शिलाई: अनुसूचित जनजाति संगठनों की बैठक में केंद्रीय हाटी समिति को नहीं बुलाए जाने पर समिति में रोश, राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र... ddnewsportal.com

शिलाई: अनुसूचित जनजाति संगठनों की बैठक में केंद्रीय हाटी समिति को नहीं बुलाए जाने पर समिति में रोश, राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र... ddnewsportal.com

शिलाई: अनुसूचित जनजाति संगठनों की बैठक में केंद्रीय हाटी समिति को नहीं बुलाए जाने पर समिति में रोश, राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र...

बीते 10 जून को पीटरहाॅफ शिमला में हि०प्र० की अनुसूचित जनजाति संगठनों की बैठक में गिरिपार क्षेत्र की हाटियों के अनुसूचित जनजातीय दर्जे के लिए 55 वर्ष तक संघर्ष करने वाली अधिकारिक एवं पंजीकृत संस्था "हाटी समिति" को नहीं बुलाए जाने पर समिति ने रोश और दुख प्रकट किया है। समिति ने इस बाबत आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर अपनी बात रखी है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का अध्यक्ष को लिखे पत्र में केंद्रीय हाटी समिति ने कहा है कि पिछले साढ़े पांच दशकों के लंबे संघर्ष के बाद 4 अगस्त 2023 को हमारे गिरीपार क्षेत्र के हाटी समुदाय को जनजाति का संवैधानिक अधिकार प्राप्त हुआ है। जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह सहित केंद्रीय जनजाति मंत्रालय तथा केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का सदैव सकारात्मक सहयोग मिला है। इस सहयोग के लिए गिरिपार क्षेत्र की अढाई लाख हाटी जनता की ओर से हमारी हाटी समिति सदैव आभारी है और रहेगी।

समिति अध्यक्ष डाॅ अमीचंद कमल और महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री ने कहा कि गत 10 जून को पीटरहाॅफ शिमला में केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा बुलाई गई बैठक में हिमाचल प्रदेश की सभी जनजातियों के सामाजिक संगठनों को बुलाया गया था लेकिन साढ़े पांच दशकों से हाटी समुदाय को जनजाति दर्जा दिलाने के लिए आधिकारिक तौर पर निरंतर संघर्ष करने वाली पंजीकृत "हाटी समिति" को बैठक की सूचना तक नहीं दी गई जिसका हाटी समिति को बहुत दु:ख है। क्योंकि हाटी समिति समय समय पर मिले सहयोग के लिए केंद्रीय जनजाति आयोग का धन्यवाद व्यक्त करने के साथ हाटी जनजाति समुदाय से सम्बन्धित कुछ महत्वपूर्ण विषय भी आयोग के समक्ष रखना चाहती थी। हाटी समिति ने केंद्रीय जनजाति आयोग के समक्ष पत्राचार के द्वारा कुछ महत्वपूर्ण विषय पहले से भी उठाए हैं जिनमें जनजाति का संवैधानिक अधिकार मिलने के बावजूद भी लाभ नहीं मिलने से हमारे हजारों शिक्षित बेरोजगार युवाओं और विद्यार्थियों को हो चुका तथा हो रहा नुक़सान प्रमुख है। नौजवान पीढ़ी को हो रहे इस भारी नुकसान का विषय हम आयोग से समक्ष रखना चाहते थे।

क्योंकि 4अगस्त 2023 को हाटी जनजाति कानून की गजट अधिसूचना जारी हुई थी लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार के जनजाति मंत्रालय द्वारा अनावश्यक आपत्तियां लगाते हुए केंद्र सरकार से पत्राचार का बहाना बना कर हाटी जनजाति कानून को लागू करने में विलम्ब किया गया। केंद्र सरकार से जवाब मिलने तक राजनीति से प्रेरित कुछ सामाजिक संगठनों ने उच्च न्यायालय शिमला में हाटी जनजाति कानून के विरुद्ध चार रिट याचिकाएं दायर की गई जिसमें राज्य तथा केंद्र सरकार को पक्षकार बनाया गया है (सभी पक्षकारों के जवाब दावे दायर हो चुके हैं और आगामी 19 जून को माननीय उच्च न्यायालय शिमला में सुनवाई भी होनी है।) हाटी जनता की नाराज़गी आन्दोलन के द्वारा प्रदेश सरकार तक भी पहुंची और उसी के चलते प्रदेश सरकार ने माननीय न्यायालय में याचिका का जवाब दिए बिना आनन-फानन में एक जनवरी 2024 को हाटी जनजाति कानून को लागू किया जिसके चलते कुछ लोगों के लगभग 150 हाटी जनजाति प्रमाणपत्र भी बन चुके हैं लेकिन तीन दिन बाद 4 जनवरी 2024 को माननीय उच्च न्यायालय ने हाटी जनजाति कानून का लाभ लेने पर स्थगन आदेश दिए हैं। तब से लेकर आज तक हमारा हाटी समुदाय जनजाति का कानूनी अधिकार मिलने के बावजूद भी लाभ लेने से वंचित है। इस बारे में केंद्रीय हाटी समिति द्वारा पहले भी केंद्रीय जनजाति आयोग को पत्राचार के द्वारा अवगत कराया जा चुका है। अतः जनजाति आयोग से हमारा निवेदन है कि माननीय न्यायालय के स्थगन आदेश के चलते जनजाति आरक्षण का लाभ लेने से वंचित ओवरएज हो रहे हमारे हजारों हाटी युवाओं और विद्यार्थियों को हुए नुकसान की भरपाई करने के बारे में सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए। साथ ही हाटी समिति को इस महत्वपूर्ण बैठक से बाहर रखने का क्या कारण हैं? यदि हमें इस बारे अवगत करवाया जाएगा तो हाटी समिति आपकी आभारी रहेगी। हाटी समिति इस संबंध में आपके उत्तर की अपेक्षा रखती है।

इस पत्र की प्रतिलिपि समिति ने केंद्रीय गृह मंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली, केंद्रीय जनजाति मंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली, महामहिम राज्यपाल महोदय हि० प्र० और मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को भी भेजी है।