Kafota News: मस्तभोज के शरली में सामाजिक परंपराओं में सुधार को ऐतिहासिक निर्णय ddnewsportal.com
Kafota News: मस्तभोज के शरली में सामाजिक परंपराओं में सुधार को ऐतिहासिक निर्णय, गांव की खुमली में महत्वपूर्ण फैसले
जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र में शादी-विवाह समारोह को कम खर्चीला बनाने का शिलाई क्षेत्र के 52 गांव का फैसला तो सभी को पता ही है। अब नागरिक उपमंडल कफोटा के अंतर्गत मस्तभोज क्षेत्र के शरली गांव में भी इसी तरह का एक महत्वपूर्ण फैसला हुआ है जिसे आने वाले समय में निश्चित रूप से अन्य गांव भी अपना सकते है। शरली गांव में वरिष्ठ जनों और युवाओं ने गहन विचार विमर्श के बाद सर्वसम्मति से विवाह और समाज सुधार के निर्णय लिए है। उल्लंघन करने वालों को गांव और पंचायत के द्वारा दंडित किया। सभी निर्णय तत्काल से ही लागू होंगे।

स्थानीय बुद्धिजीवी कुंदन सिंह शास्त्री, दयाल सिंह चौहान, ग्यार सिंह चौहान, जगत सिंह, दलीप चौहान और युवा शूरवीर चौहान आदि ने कहा कि सामाजिक परंपराओं में समय-समय पर कुछ सुधार और बदलाव की आवश्यकता महसूस की जाती है, इसी दृष्टि से 25 अक्टूबर 2026 रविवार, शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर शरली गांव की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसमें गांव के वरिष्ठ जनों और युवाओं ने भाग लिया। गहन विचार विमर्श के बाद सौहार्दपूर्ण वातावरण में सर्वसम्मति से कुछ महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए जिन्हें आज से ही लागू किया गया है। इन निर्णय का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध गांव तथा पंचायत की ओर से सख्त कार्रवाई करने का प्रावधान भी रखा गया है।
????- विवाह संबंधी:-
लड़के तथा लड़की की शादी में रिश्ता करते समय गांव का खर्चा (माश खाने की परंपरा) और लकड़ी काटते समय पूरे गांव की धाम, शादी के बाद कारबारिया (टोलुआ) की दावत तथा पुल्टोज की परंपरा को बंद कर दिया गया है। अब रिश्ता करते समय लड़के के साथ तथा पुल्टोज में भी दूल्हा दुल्हन के साथ उसके परिवार के सदस्य ही जाएंगे गांव के लोग नहीं।
????- अपने घर में शादी के पहले दिन मामा स्वागत की खर्चीली दावत बंद कर दी गई है उस दिन केवल भांजे के मामा मामी, या परिवार के सदस्य ही शगुन लेकर आएंगे और अपने घर में कोई डीजे भी नहीं बजेगा। बाकी गांव के लोग भी भांजे की शादी में मामा के रूप में बारात के दिन (मुख्य दावत के दिन) ही एक साथ अपने अपने खर्चे पर तालमेल बनाकर मोउले के रुप में जाएंगे।
इसी तरह से भांजी की शादी में भी पहले दिन मामा मामी,भाई या परिवार के सदस्य ही जाएंगे। गांव के लोग मुख्य दावत के दिन एक साथ जाएंगे। आने वाले मामा और रिश्तेदारों को शादी से पहले ही ये नियम बता दिए जाएंगे ताकि रिश्तेदारों में किसी प्रकार की दुविधा या संशय नहीं रहे।
???? बारात में अपने बेड़े से एक एक व्यक्ति प्रति परिवार तथा अन्य बेड़े से 5-5 व्यक्ति प्रति बेड़ा निर्धारित किया गया है बाकी उनके अतिरिक्त रिश्तेदार जा सकेंगे। बारातियों की संख्या भी सीमित रखनी होगी।
???? बड़ी शादी की मुख्य दावत पहले दिन शाम को तथा दूसरे दिन नेवदा रस्म के साथ दोपहर को मेहमानों के साथ पूरे ग्राम वासियों के लिए भी एक साथ सामुदायिक भवन में धाम के रूप में होगी। कोई भी परिवार शादी में अपनी सुविधा अनुसार सुबह या शाम को एक ही दावत भी रख सकता है।
???? जेवरात: आज कल सोने चांदी के दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुके हैं। फिर भी शादियों में आभूषण पहनने की होड़ लगी रहती है जो हर परिवार के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। चोरी और छीना झपटी की घटनाएं भी बढ़ रही है। इसी दृष्टि से शादी में दुल्हन को जेवर पहनने की परम्परा को सीमित कर दिया गया है जिसमें (तीन गहने सोने के- मंगल सूत्र के साथ नाक और कान के जेवर तथा दो गहने चांदी के- पायल और पुलड़ी) तक सीमित कर दिया है। शादी समारोह के अलावा गांव की कोई भी महिला स्वेच्छा से गहने पहन सकती है। इस निर्णय से महिलाओं में सामाजिक समानता और समरुपता को भी बढ़ावा मिलेगा।
???? शादी में पहले दिन शाम को भोजन के बाद नाच-गाना और मनोरंजन की दृष्टि से रात बारह बजे तक डीजे बजाने की अनुमति होगी। इसी तरह से नेवदा रस्म के दिन हाटी लोक संस्कृति और गीतों का मुजरा कार्यक्रम होगा और दोपहर भोजन के बाद पांच बजे तक डीजे पर महिला पुरुषों का संयुक्त रूप से नाच-गाना हो सकेगा।
???? बुराई बन चुकी दहेज प्रथा:- लड़का या लड़की की शादी में दहेज लेना और देना बंद कर दिया गया है। लड़की को परम्परागत सोबे के तौर पर पांच बर्तन, एक संदूक तथा कपड़े दिए जा सकेंगे और उसके साथ बिना दिखावे के नकद राशि गुप्त दान के रूप में दी जा सकेगी।
???? भांजे की शादी में सेहरा चोटी के साथ सूट बूट और लड़के की माता को भी सूट दिया जाएगा बाकी को बंद लिफाफे में शगुन दिया जा सकेगा। इसी तरह से भांजी की शादी में भी भांजी को एक परात के साथ सूट-बूट, लड़की की मां को एक सूट दिया जाएगा और बाकी परिवार को बंद लिफाफे में शगुन दिया जाएगा।
???? भांजे के लिए डंग के एवज में मस्तभोज खत में पूर्व निर्धारित 105 रुपए दिए जाएंगे।
???? लड़के तथा लड़की की शादी में पंडित द्वारा वेदी पर विवाह संस्कार सम्पन्न करने पर 1100 रुपए देने का निर्णय लिया गया है ताकि रिश्तेदारों में किसी प्रकार का संशय या दुविधा नहीं रहे।
???? इसी तरह से नाई द्वारा शादी के निमंत्रण देने जाते समय उसे रास्ते का किराय खर्चा के अतिरिक्त शादी में सहयोग करने के लिए 1100 रुपए नकद राशि देने के लिए निर्धारित की गई है साथ ही उसके परिवार को भोजन व्यवस्था भी रहेगी।
????गांव में शराब सहित नशे की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध:
युवाओं में नशे के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए गांव में किसी भी तरह का नशा बेचने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया गया है। नशा बेचने वाले को सामाजिक रुप से दंडित करने के साथ पुलिस प्रशासन में भी शिकायत दर्ज की जाएगी।

???? बारात में शराब ले जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। शादी की दावत में भी शराब परोसने की खुली परम्परा को सीमित कर दिया गया है और भविष्य में चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह से रोक लगाने का प्रयास जारी रहेगा।
???? लड़की के पास बच्चा पैदा होने पर लड़की की मां,चाची, भाभी, बहन बुआ आदि उसी परिवार से सम्बन्धित महिलाएं प्रसूता बेटी और उसके परिवार को भोजन लेकर जाएगी। ना कि गांव की महिलाओं के लिए। अन्य किसी भी तरह की सामग्री भी नहीं ले जाएगी। अपने घर पर बच्चा पैदा होने पर भी इस रिवाज के बारे में आने वाले रिश्तेदार (बहू के मायके वालों ) को पहले ही बता दिया जाएगा।
सभी ग्राम वासियों से आग्रह है कि आज सर्व सम्मति से और सभी के हित में लिए गए उपरोक्त निर्णयों का ईमानदारी और निष्ठा के साथ पालन करें और अपने रिश्तेदारों को भी इन निर्णयों की जानकारी दें। निकट भविष्य में कुछ और भी सुधारवादी निर्णय लिए जाते रहेंगे। परम्पराएं जब समस्या लगने लगे तो उन्हें बदलना ही चाहिए।