शिलाई: 66 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया पंचायत चुनाव में चलती है लोटा नमक व्यवस्था, पढ़ें किसने किया सर्वे और क्या हुए खुलासे... ddnewsportal.com
शिलाई: 66 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया पंचायत चुनाव में चलती है लोटा नमक व्यवस्था, पढ़ें किसने किया सर्वे और क्या हुए खुलासे...

राजकीय महाविद्यालय शिलाई की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई एक और दो ने प्राचार्य डॉ• जे• आर• कश्यप के मार्गदर्शन में और कार्यक्रम अधिकारी यशपाल शर्मा तथा रंजना चौहान के नेतृत्व में राष्ट्रीय सेवा योजना के वार्षिक सप्त दिवसीय शिविर के दूसरे दिन योगाभ्यास तथा प्रार्थना सभा खत्म होने के बाद स्वयंसेवकों ने संपूर्ण महाविद्यालय की सफाई की। तत्पश्चात रिसोर्स पर्सन के रूप में उपस्थित स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, शाखा शिलाई के मैनेजर रूपक कुमार ने इंश्योरेंस, डिजिटल करेंसी, वित्तीय धोखाधड़ी, साइबर अरेस्ट आदि जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करते हुए स्वयंसेवकों को जागरूक तथा सतर्क रहने की नसीहत दी।

दिन के दूसरे सत्र में गोद लिए गए गांव नाया में लैंगिक संवेदीकरण पर एक जागरूकता कार्यक्रम संपन्न करने के बाद स्वयंसेवकों ने आगामी पंचायती चुनाव को मद्देनज़र रखते हुए मतदाता जागरूकता के संदर्भ में एक सर्वे किया। सर्वे के सैंपल्स (62) के अनुसार 66% लोगों ने यह स्वीकार किया कि गांव में अभी भी पंचायत चुनाव के समय में लोटा नमक (नीम करना) व्यवस्था चलती है। 44% लोग यह मानते हैं कि पंचायत स्तर (प्रधान, उप प्रधान और वार्ड मेंबर्स) के प्रतिनिधियों का चुनाव राजनीतिक दल आधारित होता है। हालांकि 71% पुरुष इस बात को स्वीकार नहीं करते। 16% लोगों ने माना कि उन्हें किसी व्यक्ति विशेष को वोट देने के लिए विवश किया जाता है। महिलाओं में ऐसा मानने वालों की संख्या पुरुषों से 6 गुना अधिक है।

72% लोगों ने स्वीकार किया कि महिलाओं को पंचायत स्तर पर 50% आरक्षण मिलने से उनकी स्थिति में सुधार आया है। इसमें गौर करने वाली बात यह है कि यह तथ्य महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों ने अधिक स्वीकार किया है। 64% लोगों ने माना कि एक महिला स्वेच्छा से किसी प्रतिनिधि को मतदान नहीं कर पाती है, बल्कि उसे परिवार के पुरुषों की राय के अनुसार मतदान करना पड़ता है। दिलचस्प बात यह है कि ऐसा मानने वालों में पुरुष और महिलाओं का अनुपात लगभग एक समान है। 62% लोगों ने माना कि पंचायत प्रधान गांव के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं।
तथ्यों के बहुआयामी विश्लेषण (विभिन्न आयु वर्ग और विभिन्न शैक्षणिक स्तर आधारित) से पता चलता है कि इसमें तुलनात्मक अंतर अधिक नहीं है।
