Himachal News: भांग की नियंत्रित खेती- खेती करने को तीन लाख और उद्योग लगाने को दो करोड़ रुपए का लाइसेंस, पढ़ें विस्तार से... ddnewsportal.com

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Himachal News: भांग की नियंत्रित खेती- खेती करने को तीन लाख और उद्योग लगाने को दो करोड़ रुपए का लाइसेंस, पढ़ें विस्तार से...

हिमाचल प्रदेश में भांग की नियंत्रित खेती को एक तरह से सरकार ने मान्यता दे दी है। सरकार ने भांग की नियंत्रित खेती और उससे जुड़े उद्योगों के लिए सरकार ने विस्तृत लाइसेंस शुल्क एवं नियामक ढांचा तय कर दिया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मेडिकल कार्य के लिए भांग की खेती करने वाले किसानों को प्रति बीघा तीन लाख रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क देना होगा। भांग आधारित दवाओं और उत्पादों के निर्माण के लिए स्थापित होने वाली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को दो करोड़ रुपये का लाइसेंस लेना पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश मेडिकल क्षेत्र में भांग की खेती करने वाला देश का पहला राज्य बनने जा रहा है।

हर चरण पर कड़ी निगरानी:

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भांग की खेती केवल औषधीय, वैज्ञानिक और औद्योगिक उपयोग तक सीमित रहेगी। भांग के व्यापार अथवा नशे के उद्देश्य से उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। उत्पादन से लेकर भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण तक हर चरण पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। नियमों के अनुसार मेडिकल भांग की खेती करने के इच्छुक किसानों को कल्टीवेटर लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए प्रति बीघा तीन लाख रुपये वार्षिक शुल्क निर्धारित किया गया है। लाइसेंस के नवीनीकरण पर भी समान शुल्क देना होगा। खेती और मैन्युफैक्चरिंग दोनों गतिविधियां एक साथ संचालित करने वाली कंपनियों को मैन्युफैक्चरर कल्टीवेशन लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए प्रति बीघा 10 लाख रुपये शुल्क तय किया गया है। भांग आधारित औषधीय उत्पादों, अर्क और अन्य अनुमोदित वस्तुओं के निर्माण के लिए मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए दो करोड़ रुपये वार्षिक शुल्क निर्धारित किया गया है। नवीनीकरण पर भी समान राशि देनी होगी।

मेडिकल भांग परियोजना की निगरानी और नीति निर्धारण के लिए राज्य स्तरीय समीक्षा समिति गठित की जाएगी। इसकी अध्यक्षता राज्य कर एवं आबकारी विभाग के प्रशासनिक सचिव करेंगे। समिति में कृषि, उद्योग, राजस्व, बागवानी, आयुष, कृषि विश्वविद्यालय, ड्रग कंट्रोल विभाग तथा एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति लाइसेंस स्वीकृति, बीज बैंक, अनुसंधान और उद्योग स्थापना से जुड़े मामलों में सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगी।

जिलों में उपायुक्त की अध्यक्षता में समितियां: 

जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में निगरानी समितियां गठित होंगी। इनमें पुलिस अधीक्षक, कृषि, आबकारी, वन, ड्रग कंट्रोल और आयुर्वेद विभाग के अधिकारी शामिल रहेंगे। समितियां खेती क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगी और लाइसेंसधारकों की गतिविधियों पर नजर रखेंगी। किसान अपनी उपज केवल अधिकृत वेयरहाउस अथवा लाइसेंस प्राप्त मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों तक ही पहुंचा सकेंगे। इसके लिए ट्रांसपोर्ट परमिट और पास लेना अनिवार्य होगा।