Sirmaur: पहले 700 बैकडोर भर्तियों पर श्वेत पत्र जारी करें उद्योग मंत्री, फिर पारदर्शिता की बात करें : बलदेव तोमर ddnewsportal.com

Sirmaur: पहले 700 बैकडोर भर्तियों पर श्वेत पत्र जारी करें उद्योग मंत्री, फिर पारदर्शिता की बात करें : बलदेव तोमर ddnewsportal.com

Sirmaur: पहले 700 बैकडोर भर्तियों पर श्वेत पत्र जारी करें उद्योग मंत्री, फिर पारदर्शिता की बात करें : बलदेव तोमर

उद्योग मंत्री के बयान ने कांग्रेस सरकार को कठघरे में किया खड़ा, मुख्यमंत्री पारदर्शिता की बात करते हैं, मंत्री नौकरी दिलाने का श्रेय ले रहे हैं

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता बलदेव तोमर ने उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के ताजा बयान पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि मंत्री ने लगातार दूसरे दिन भी सार्वजनिक रूप से यह दावा किया है कि उन्होंने लोगों को नौकरी दिलाई। जब स्वयं मंत्री यह कह रहे हैं कि उनकी सिफारिश से लोगों को रोजगार मिला, तो कांग्रेस सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि यह रोजगार किस नियम, किस प्रक्रिया और किस चयन प्रणाली के तहत दिया गया। खासकर जब मामला बैकडोर भर्ती का हो, तो सरकार की जवाबदेही और भी बढ़ जाती है।

बलदेव तोमर ने कहा कि यदि किसी मंत्री की सिफारिश के आधार पर नियमों और पात्रता को दरकिनार कर अपने चहेतों को बैकडोर एंट्री से नौकरी दी जाती है, तो इसे उपलब्धि नहीं कहा जा सकता। असली पारदर्शिता तब होती है जब योग्य और पात्र युवाओं को निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत अवसर मिले। लेकिन पात्र युवाओं को किनारे कर अपने लोगों को लाभ पहुंचाना और फिर उसका सार्वजनिक रूप से गुणगान करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का मजाक है। यह तो वही बात हुई—एक तो चोरी, ऊपर से सीना जोरी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू एक ओर प्रदेश में बैकडोर भर्ती खत्म करने का दावा करते हैं, वहीं उनके उद्योग मंत्री लगातार दो दिन से सार्वजनिक रूप से नौकरी दिलाने का श्रेय ले रहे हैं। कांग्रेस पहले यह तय करे कि प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री की बात माने या उद्योग मंत्री के दावे पर विश्वास करे। जब सरकार खुद बैकडोर भर्ती को लेकर स्पष्ट नहीं है, तो पारदर्शिता की बातें केवल दिखावा लगती हैं।

बलदेव तोमर ने कहा कि उद्योग मंत्री ने 700 लोगों को नौकरी दिलाने का जो दावा किया है, वह गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि मंत्री अपने दावे पर कायम हैं तो सरकार तत्काल श्वेत पत्र जारी करे और बताए कि वे 700 लोग कौन हैं, उन्हें किस विभाग, बोर्ड, निगम, आउटसोर्स एजेंसी या अन्य माध्यम से रोजगार मिला, उनकी नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत हुई, उनकी पात्रता क्या थी और उनका संबंध किन क्षेत्रों से है। प्रदेश की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है।

उन्होंने कहा कि यदि सभी नियुक्तियां नियमों के अनुरूप हुई हैं तो फिर मंत्री व्यक्तिगत रूप से उनका श्रेय क्यों ले रहे हैं? और यदि वास्तव में उनकी सिफारिश के आधार पर लोगों को नौकरी मिली है, तो यह कांग्रेस सरकार के पारदर्शी भर्ती और मेरिट आधारित चयन के दावों की पोल खोलता है। बैकडोर एंट्री से दी गई नौकरियां मेहनती और योग्य युवाओं के अधिकारों पर सीधा हमला हैं।


भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले हर वर्ष एक लाख और पांच वर्षों में पांच लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था। साढ़े तीन वर्ष बीतने के बाद भी लाखों युवा भर्ती परीक्षाओं, आवेदन शुल्क और लंबी प्रतीक्षा के बीच भटक रहे हैं, जबकि कांग्रेस के मंत्री मंचों और प्रेस वार्ताओं में नौकरी दिलाने की उपलब्धियां गिना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश का शिक्षित बेरोजगार युवा आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। जिन युवाओं ने मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की, उन्हें अवसर नहीं मिल रहा, जबकि सत्ता के संरक्षण में बैकडोर भर्ती की राजनीति का महिमामंडन किया जा रहा है। यह मेहनती युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
बलदेव तोमर ने कहा कि भाजपा इस पूरे मामले को गंभीरता से उठा रही है और सरकार से मांग करती है कि 700 नौकरियों के दावे पर तत्काल श्वेत पत्र जारी किया जाए। यदि मंत्री का दावा सही है तो सरकार पूरी सूची सार्वजनिक करे और यदि दावा गलत है तो प्रदेश की जनता को गुमराह करने के लिए मंत्री सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। बैकडोर भर्ती पर पर्दा डालने की कोशिश अब नहीं चलेगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। अब समय आ गया है कि सरकार जवाबदेही तय करे और बताए कि प्रदेश में रोजगार मेरिट से मिलेगा या मंत्रियों की सिफारिश और बैकडोर व्यवस्था से। भाजपा इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से उठाएगी और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी।