Paonta Sahib: सीबीएसई विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियां हों पूर्णतः मेरिट आधार पर ddnewsportal.com

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Paonta Sahib: सीबीएसई विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियां हों पूर्णतः मेरिट आधार पर, शिक्षक संगठन और अभिभावकों ने उठाई माँग

हिमाचल प्रदेश के 158 सरकारी सीबीएसई विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पर अचानक लगे ब्रेक ने शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों के बीच गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। स्क्रीनिंग टेस्ट, मेरिट सूची और काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी नियुक्तियों को रोकने के निर्णय पर कई सवाल उठ रहे हैं।

शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार को पहले से कार्यरत शिक्षकों को ही इन विद्यालयों में बनाए रखना था, तो फिर हजारों शिक्षकों से स्क्रीनिंग टेस्ट लेने और मेरिट सूची तैयार करने का औचित्य क्या था? उनका तर्क है कि परीक्षा का उद्देश्य ही योग्य और प्रतिभाशाली शिक्षकों का चयन करना था। ऐसे में मेरिट में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को नियुक्ति से वंचित करना पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

जानकारों के मुताबिक स्क्रीनिंग टेस्ट में कई ऐसे शिक्षक भी मेरिट में आए हैं जो वर्तमान में अन्य विद्यालयों में कार्यरत हैं और जिनके अंक कई मौजूदा सीबीएसई विद्यालयों में तैनात शिक्षकों से अधिक हैं। ऐसे में यदि मेरिट को दरकिनार कर वर्तमान व्यवस्था को बनाए रखा जाता है, तो यह योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय माना जाएगा।

अभिभावकों का कहना है कि सरकारी सीबीएसई विद्यालयों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। यदि चयन प्रक्रिया में योग्यता और मेरिट के बजाय अन्य कारकों को प्राथमिकता दी जाती है, तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा और भविष्य पर पड़ेगा। उनका मानना है कि विद्यार्थियों के हित में सर्वश्रेष्ठ और सर्वाधिक योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए।

शिक्षक संगठनों का भी कहना है कि मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया को रोकना शिक्षकों के मनोबल को कमजोर करेगा तथा इससे सरकार के प्रति अविश्वास और आक्रोश की भावना बढ़ सकती है। उनका कहना है कि जब सरकार ने स्वयं परीक्षा आयोजित करवाई और मेरिट सूची जारी की, तो अब उसी मेरिट को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।

अभिभावकों, शिक्षाविदों और शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि विद्यार्थियों के भविष्य को सर्वोपरि रखते हुए सीबीएसई विद्यालयों में नियुक्तियां पूर्णतः मेरिट के आधार पर की जाएं। उनका कहना है कि पारदर्शिता, योग्यता और निष्पक्षता ही शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बना सकती है, जबकि मेरिट की अनदेखी से न केवल शिक्षकों का विश्वास टूटेगा बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
"यदि चयन मेरिट के आधार पर नहीं होना था, तो फिर स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित करने और शिक्षकों से परीक्षा दिलवाने का क्या औचित्य था?" — यही प्रश्न आज हजारों शिक्षक और अभिभावक सरकार से पूछ रहे हैं।